मेरे राम
मेरे राम
मर्यादा का है उदाहरण,
मेरे प्रभु श्री राम जी।
नाम अगर इनका जप लो तो,
पूर्ण हो सब काम जी।
गुरु के आश्रम में जाकर,
सच्ची शिक्षा उन्होंने पाई।
बचपन की मित्रता देखो,
पूरे जीवन है निभाई।
गुरु आज्ञा को भगवन पाकर,
लक्ष्मण संग में चली वो लेकर।
राक्षसी ताड़का मार गिराई,
स्वयंवर जीत कर सीता पाई।
पिता का वचन पूरा करने को,
चौदह वर्ष गए हो वन को।
देह छोड़कर पिता चले गए,
बिना पिता के रघुवर रह गए।
सोन मृग एक वन में आया,
सीता मां का मन ललचाया।
पीछा करने गए जो रघुवर,
रावण ले गया सीता हरकर।।
कुटिया में सीता ना पाकर,
दुखी हो गए रघुवर।
सीते-सीते कह के भगवन,
प्रिय को ढूंढे देखो वन-वन।
मिले जटायु राज बताया,
लंका का रास्ता दिखलाया।
सीता की खोज में निकले,
मित्र हनुमत जैसे मिले।
सागर पार गए हनुमंता
भस्म करी सोने की लंका।
मां सीता का पता लगाया
प्रभु संदेश उन तक पहुंचाया।
सागर पर पुल को बनवाया,
विभीषण को भी मित्र बनाया।
लंका पर प्रभु ने की चढ़ाई,
मार के रावण सीता पाई।
पुष्पक विमान में बैठ रघुवर,
अवध में पहुंचे वह अपने घर।
खुशी से देखो सब हर्षाए,
सब ने घर पर दिए लगाएं।
रामराज्य वहां किया स्थापित,
सबका हृदय हुआ बहु हर्षित।।
मिलकर बोलो जयश्री राम,
पूर्ण होंगे सबके काम।
