मेरे देश की मिट्टी
मेरे देश की मिट्टी
देश की मिट्टी में मेरी,
कोई तो ऐसी बात है कि,
लाख हसरतों के बाद भी,
मिटती नहीं हस्ती यहाँ,
कर लें जतन दुश्मन अनेकों,
चमन में फूल ही खिलते यहाँ,
और प्रेम की रसधार बहती,
सुहृदय शांत चित्त मिलते यहाँ,
कि क्या झुकाएँगे तिरंगा,
वो देश जो दुश्मन बने,
हर बच्चा ही है वीर,
और है देश का रक्षक यहां,
ये देश सींचा गांधी भगत ने,
इसकी नींव में वो शक्तियां,
जो तोड़ दे ये नींव,
इतना बल बता दो है कहाँ,
ये स्वर्ग सी धरती पुरातन,
इसमें इतनी खूबियां,
कि दुश्मनों को भी सदा,
प्यार ही मिलता यहाँ|
