Shraddhanjali Shukla
Drama
मौसम हुआ, खामोश सा
इंसान है, मदहोस सा
लाई घटा, वीरानगी
हर ओर है, आवारगी
आगाज है, ये कौन सा
संसार भी, है मौन सा
मौसम हुआ, बेहाल तो
आकर रहे, अकाल वो।
माँ भारती के...
आल्हा छंद
मौसम
अपराध
माँ शेरों वाल...
छल
कोरोना
महादेव
जिंदगी
आज के रिश्ते
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ? फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ?
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
लंका में अग्निकांड भी मैं था लंका में अग्निकांड भी मैं था
इसी से ही जीवन में उन्नति खुशहाली है आनी क्योंकि धरती और मैं विश्व की महतारी हूँ इसी से ही जीवन में उन्नति खुशहाली है आनी क्योंकि धरती और मैं विश्व की महतारी ...
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
कई बार दोस्तों से खेल खेल में कट्टी और फिर अब्बा किया करते थे कई बार दोस्तों से खेल खेल में कट्टी और फिर अब्बा किया करते थे
और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में। और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में।
बिन ब्याही औरत किसी मर्द के साथ रहे तो वह 'रखैल' हुयी.. बिन ब्याही औरत किसी मर्द के साथ रहे तो वह 'रखैल' हुयी..
यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही, यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही,
मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है, मैं पिरोती जाऊं मोती आस के ना जाने क्यूं धागा फिसल जाता है,
चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है। चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है।
मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ? मतदान का फिर क्या होगा? आपका एक वोट वहां कम न होगा ?
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ
उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है। उसके प्रांगण में दौड़ता मेरा वर्तमान थम जाता है, तब मेरा गाँव मुझे याद आता है...
अब जब मैं जब गीले बाल से ही रसोई में घुसती हूँ तुम सी ही लगने लगती हूँ माँ... अब जब मैं जब गीले बाल से ही रसोई में घुसती हूँ तुम सी ही लगने लगती हूँ माँ...
दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं. दर्द दबाकर रखा है दफन सीने में और उन्हें कराह भी करना तक नहीं.
क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता ! क्योंकि कुछ चीज़ों का कभी बँटवारा नहीं होता !
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...