STORYMIRROR

Shraddhanjali Shukla

Abstract

3  

Shraddhanjali Shukla

Abstract

महादेव

महादेव

1 min
232

पियो हलाहल आप ही, कर दो अब उद्धार।

माफ़ करो जन पाप को, अब ए तारनहार।


घोर विपदा का काल है, भटक रहा है काल।

शरण पड़े सब आपकी, बचा हे महाकाल।


पाप कर्म में लिप्त थे, घिरे अधम से रोज।

सजा मिले पर डर रहे, फैला खौफ का ओज।


बालक अपना जानके, करो क्षमा प्रभु आप।

प्रकृति प्रलय है खेलती, हरे कौन संताप।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract