STORYMIRROR

Neena Ghai

Tragedy

5.0  

Neena Ghai

Tragedy

मौसम शीरीं था

मौसम शीरीं था

1 min
621


मौसम शीरीं था

हम मशगूल थे

अपनी हाफ़िज़ा के साथ,


न जाने क्यों,

यह भी गँवारा न हुआ

हमारे चाहने वालों के साथ।


किसी से क्या करें शिकवा

कुछ अपने ही सितारे गर्दिश

में थे और कुछ उनकी मेहरबानियों

की थी नवाज़िश।


न जाने क्यों,

यह भी गँवारा न हुआ

हमारे चाहने वालों के साथ।


कभी चाहत थी बैठ उनके पहलू में

मुस्कराते रहे हम

आज आलम यह है

उनकी याद में खोये हुये बेवजह

मुस्करा देतें हैं हम।


पर न जाने क्यों,

यह भी न गँवारा न हुआ

हमारे चाहने वालों के साथ।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy