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Pushpa Srivastava

Romance

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Pushpa Srivastava

Romance

मैंने तुम्हें पाया

मैंने तुम्हें पाया

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साथी मैंने तुमसा पाया

तुम हो बहुरंगी छाया।

किस्मत ने तुमसे मिलाया

खुश हूँ बहुत तुम्हें पाया।


जीने की आस जब-जब

टूट कर लगी थी बिखरने।

मन की उस हीन भावना

को तब तुम आए थे हरने।


जब हार रही थी मैं

जीवन के हर क्षण से।

आए तब तुम उस

नभ के ऊंचे शिखर से।


चट्टानों से अडिग तुम

उतरे आकाशी रथ से।

भर लाए अपने साथ

तुम सारे रंग अम्बर से।


चाहत में हठ के व्रत

तोड़ दिए हैं हमने सारे।

हो गए इस कदर अब

कि बिन फेरे हम तेरे।


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