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AVINASH KUMAR

Tragedy

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AVINASH KUMAR

Tragedy

मैं तुझमें घुल जाऊं

मैं तुझमें घुल जाऊं

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तेरे जिक्र से शुरू होती सुबह मेरी

तेरी फरियाद से खत्म होता दिन मेरा


मैं खुदा से मांगता सिर्फ तुझको 

तुझी पर फिदा है ये दिल मेरा 


अजीबोगरीब है हालत मेरी

जाने किस दिन होगा तू मेरा 


अफसोस तो हरपल रहता है तुझे खोने का

रोज बुनता हूँ सपना तेरे साथ होने का 


मेरा प्रेम तेरे लिए बन चुकी है तपस्या 

देखना है अब वक़्त आयेगा वरदान पाने का 


हकीकत से है सरोकार मुझको 

ख्यालों में तो तू मेरा ही है 


जुगनूओं सा जो चमके काली घनी रातों

में भी वो प्यार मेरा ही है 


मैं तुझमे घुल जाऊं तू मुझमे घुल जाएँ 

ऐ मेरे मालिक जल्द ही ऐसा वक्त आए


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