मैं तो आहत हूं
मैं तो आहत हूं
मैं तो इस समय
किसी से आहत हूं
कल भी थी
आने वाले कल में भी रहूंगी
मैं तो पिछले कई सालों से
किसी से आहत हूं
यह आहत करने वाले लोग
कोई अजनबी, अंजान या
राह चलते नहीं होते बल्कि
अधिकतर ऐसे लोग
घर के ही सदस्य होते हैं जो
दिल के सबसे करीब होते हैं और
जिनसे बुरे व्यवहार की कभी
अपेक्षा नहीं होती लेकिन
सच्चाई सपनों से परे होती है
सबसे अधिक दिल दुखाने
वाले
दिल तोड़ने वाले
दिल को आहत करने वाले
कोई और नहीं
आपके सबसे अपने ही होते हैं
वह जो कुछ भी करते हैं
उसे करने की कोई आवश्यकता
नहीं होती
न ही उससे कोई लाभ होता है
न ही उसके पीछे कोई कारण होता है
कुछ बोले या
अपनी बात रखी या
कुछ समझाने की कोशिश करी तो
कभी न खत्म होने वाला
आरोप प्रत्यारोपों का दौर
चल पड़ेगा
झगड़ा या
मनमुटाव और बढ़ जायेगा
ऐसे लोग
कभी सुधरते नहीं
इंसान की छोड़ो
भगवान भी उन्हें सुधार नहीं
सकता
बेहतर है ऐसे लोगों से
एक उचित दूरी बनाये रखें
हो सके तो कम से कम इनके सामने पड़े
इनसे न के बराबर बोलें या
संबंध रखें
इन्हें देख कर पीछे हट जायें
दूर से ही इनसे किनारा कर लें
इनकी भलाई करने की भी
कोशिश न करें
बुराई ही हाथ लगेगी
कुछ लोग बहुत अजीबोगरीब होते हैं
एक अलग ही मिट्टी के बने
होते हैं
वह आपको आहत न करें
इसका बस एक ही उपाय है कि
उनसे जितना हो सके
उतना बचें या
हो पाये तो ऐसे लोगों के
साथ ही न रहें
एक ही छत के नीचे रहना
गर हो मजबूरी तो
इनके मुंह न लगें
इनकी तरफ ध्यान न दें और
अपने काम में व्यस्त रहें।
