STORYMIRROR

S Ram Verma

Romance

3  

S Ram Verma

Romance

मैं फिर भी तुमको चाहूंगा !

मैं फिर भी तुमको चाहूंगा !

1 min
335

मैं फिर भी तुमको चाहूंगा 

सुख के मौसम 

में राहत भरा 

स्पर्श बनकर,


मैं फिर भी तुमको चाहूंगा 

दुःख के मौसम में 

हँसी का ठहाका

बनकर,


मैं फिर भी तुमको चाहूंगा 

धूप में तेरे 

सर पर छांव

का छाता बनकर


मैं फिर भी तुमको चाहूंगा 

थकान में देह 

का आरामदेह 

बिछौना बनकर,


मैं फिर भी तुमको चाहूंगा 

और विरह की 

वेदना में साथ 

के लिए बुनी 

चादर बनकर,


मैं फिर भी तुमको चाहूंगा 

साथ तुम्हारे 

तुम्हारी ही जैसे

परछाईं बनकर !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance