मैं जमी वो आसमान सा लगता है
मैं जमी वो आसमान सा लगता है
मैं जमी वो आसमान सा लगता है
दूर बहुत है यूँ तो हम पर वो ही अपना सा लगता है।
चाहत उसके लिए दिल में कितनी ये हम नहीं जानते
पाना चाहती हूं उस हर कीमत पर अब पर क्या करूँ
वी अब भी मुझे एक हसीन सपना सा लगता है।
मैं जमी वो आसमान सा लगता है,,
दूर बहुत है हम यूं तो पर वो ही क्यों करीब सा लगता है।
हमारे दिल की बात दिल उसका कैसे समझ पाता कि
दिल उसका तो मुझमें बसता हैं,
वो शब्दो में हमारी चाहत सुनने की तलब रखता है
और इश्क़ हमारा खामोशी से बस उसमे बसता हैं।
मैं जमी वो आसमान सा लगता है, ,,
दूर बहुत है यू तो हम पर वो ही क्यों करीब सा लगता है।
खूबसूरत नहीं हूं मैं पर खुद पर क्यों अब इतना गुमान सा लगता है,
प्यार ने उसके बनाया मुझे ऐसे कि खुद में ही
अब मुझे सब कुछ नया सा लगता है।
मैं जमी वो आसमान सा लगता है,,
दूर बहुत है यू तो हम पर वो ही क्यों करीब सा लगता है।
वो कहता है हद नहीं कोई उसकी चाहत की,
इस कदर मुझे वो दिल से अपनी रूह में रखता है,
सफ़र ये जिंदगी का उससे मिलकर ही मुझे अब पूरा लगता हैं।
मैं जमीं वो आसमान सा लगता है
दूर बहुत है यूँ तो हम पर वो ही क्यों करीब सा लगता है।

