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Amit Kori

Classics

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Amit Kori

Classics

मैं जानता हूँ

मैं जानता हूँ

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मैं भी कई कहानियाँ

जानता हूँ 


चुप हूँ पर शब्दों से

बुलवाना जानता हूँ,


तुम क्या ? ऐसी तमाम

कविताएँ लिखी है हमने,


कुछ से हँसाना जानता हूँ, 

तो कुछ से रुलाना जानता हूँ।


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