STORYMIRROR

Swati K

Classics

4  

Swati K

Classics

कृष्णा :

कृष्णा :

1 min
192

कान्हा तुम फिर से आओ ना

अपनी बांसुरी की धुन पे

गोपियों संग थिरकने आओ ना

अपनी लीलाओं का


दरश कराने आओ ना

अज्ञानी है भक्त तुम्हारे

ज्ञान की जोत जलाने आओ ना

हम हैं व्याकुल भक्त तुम्हारे


पीड़ा हरने आओ ना

माखन मिश्री की थाल सजी

तुम द्वार हमारे आओ ना

हर मां बैठी आंख बिछाये


कान्हा बनने आओ ना

बाट जोहते अंध भक्त जन

दर्शन देने आओ ना

कान्हा तुम फिर से आओ ना !


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics