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Vaibhav Dubey

Romance

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Vaibhav Dubey

Romance

मांग भरूँ

मांग भरूँ

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पूछ रहे हो नाम मेरा तुम मेरे मिलने वालों से

मदिरा जैसी हया छलकती तेरे गुलाबी गालों से


नहीं झुकाओ नयनों को नयनों का मूक समर्थन दो

मांग भरूं फिर तारों से मैं मांगूं तुम्हें घरवालों से


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