माँ
माँ
हरवक्त जो बच्चों के आगे पीछे घुमा करती थी।
बच्चों के बोलने से पहले उनकी इक्षा पूरी करती थी।
घर का हर सख्श उसका था, वो पूरे घर की मददगार थी।
आज वही बैठी है अपने ही घर के कोने में।
आस लगी है दरवाजे पर अबतो कोई आयेगा।
भूके इस पेट को कोई एक रोटी प्यार से खिलायेगा।
मदद करेगा बैठाने में, मेरी तकलीफ भी सुन जायेगा।
मदद से उसकी बड़े हुयेजो, वो आज उन्ही पर बोझ थी।
ली सांस आखरी जब उसने, तबभी कोई न पास आया।
पड़ोसियों की मदद से उसको दिया गया फिर दफना।
