STORYMIRROR

Anita Sharma

Tragedy Classics Children

4  

Anita Sharma

Tragedy Classics Children

माँ

माँ

1 min
221

हरवक्त जो बच्चों के आगे पीछे घुमा करती थी। 

बच्चों के बोलने से पहले उनकी इक्षा पूरी करती थी। 


घर का हर सख्श उसका था, वो पूरे घर की मददगार थी। 

आज वही बैठी है अपने ही घर के कोने में। 


आस लगी है दरवाजे पर अबतो कोई आयेगा। 

भूके इस पेट को कोई एक रोटी प्यार से खिलायेगा। 


मदद करेगा बैठाने में, मेरी तकलीफ भी सुन जायेगा। 

मदद से उसकी बड़े हुयेजो, वो आज उन्ही पर बोझ थी। 


ली सांस आखरी जब उसने, तबभी कोई न पास आया। 

 पड़ोसियों की मदद से उसको दिया गया फिर दफना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy