माँ चन्द्रघंटा
माँ चन्द्रघंटा
या देवी सर्वभूतेषु मां चंद्रघण्टा रुपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
मां पार्वती का विवाहित रूप।
अवतार है मां चन्द्रघंटा का।।
अर्ध चन्द्र मां पार्वती ने माथे पर सजाया था।
नाम तब से मां पार्वती का पड़ा चन्द्रघंटा था।।
बाघिन उनका बना है वाहन।
हाथ मां अपने दस दर्शाती हैं।।
दाहिने हाथों में कमल, तीर, धनुष और जप माला।
पांचवें दाहिने हाथ में मां अभय मुद्रा अपनाती है।।
मां चंद्रघंटा का रूप है शांति स्वरूपा।
मां माथे अपने पर आधा चंद्र लगती हैं।।
आधा चंद्रमा और घंटा अपने से मां।
बुरी आत्माओं से अपने भक्तों को दूर कराती हैं।।
अपने घंटा की आवाज से मां चंद्रघंटा।
हजारों दुष्ट राक्षसों को मृत्यु देवता तक भेज देती हैं।।
राक्षसों का पल भर में संहार है करती।
मां पार्वती का रूप है कहलाती।।
मां का प्रिया भोग खीर है।
भक्त बड़े भाव से हैं भोग लगाते।।
मां को पीले फूल वस्त्र सुनहरे भाते।
रूप तब उनका बड़ा सलोना लगता।।
जो भी भक्त आराधना सच्चे मन से करता।
सौम्यता विनम्रता और निर्भयता का विकास है होता।।
सारे कष्टों से मां मुक्ति तब दे देती।
और सहज ही परम पद का अधिकारी बना देती।।
