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Ravi Jha

Tragedy

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Ravi Jha

Tragedy

माँ और मौसी

माँ और मौसी

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किसी मशहूर कवि की एक पंक्ति मैं चुराता हूँ 

हिंदी को माँ और उर्दू को मौसी मैं पुकारता हूँ।


शब्द दिनकर और अल्फाज़ गालिब की देता हूँ

हिंदी-उर्दू की पारस्परिक संबंधो को बताता हूँ।


तालीम नहीं उर्दू की इसका मुझे अफसोस है 

शायद इसीलिए मेरा फैज़ अभी खामोश है।


परिपक्व नहीं दिनकर मेरा इसका मुझे रोष है 

इसीलिए मेरी कविताओं में अभी कुछ दोष है।


न उर्दू जुबान मुस्लिम की न हिंदी है हिंदुओं की

अरे! उर्दू जुबान है शायर की हिंदी है कवियों की।


उर्दू शालीनता सिखाती हिंदी बढाती आत्मीयता 

धर्म और मजहब पर नही बंटती है नागरिकता।


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