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Vinita Singh Chauhan

Abstract

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Vinita Singh Chauhan

Abstract

माॅ॑

माॅ॑

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मां ही जीने का आधार।

मां ही जीवन की संवार।।

मां की वजह से ही,

देखा मैंने यह संसार।


मां ही जीवन का सार।

मां से होते सपने साकार।।

मां की वजह से ही,

लिया धरा पर आकार।


जीवन में मां का प्यार।

आंचल में मां के संस्कार।।

मां की दुआएं ही सदा,

देती है मुश्किलों से उबार।


         


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