STORYMIRROR

vijay laxmi Bhatt Sharma

Action Inspirational

3  

vijay laxmi Bhatt Sharma

Action Inspirational

क्यूँ

क्यूँ

1 min
263

क्यूँ प्रेम पाश में बंधती हो

हे नारी क्यूँ तुम खुद को छलती हो

ये देह के पुजारी दिल को कुचलते

तुम क्यूँ दिल की बात सुनती हो

नहीं बने ये चाँद सितारे और

ये प्रेम के रीते प्याले तुम्हारे लिये

तुम क्यूँ आसमान छूने से डरती हो

उठो छू लो आग उगलते सूरज को

बदल दो तुम आँधियों का रूख

आग में तप कुंदन बनना सीखो

तुम क्यूँ चुप रह सब सहती हो

रणचण्डी बन तुम अब शत्रु कुचलना सीखो

पोंछ लो इन आँसुओं को

उठो अब तुम हवा का रूख बदलना सीखो

ले उड़ो इन तिनको को दूर कहीं पटको

आकाश पर चलना, नींद में जगना सीखो

तुम धर्म पताका लहरा अब

मिटा लिंग भेद कृष्ण बनना सीखो।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action