Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer
Become a PUBLISHED AUTHOR at just 1999/- INR!! Limited Period Offer

vijay laxmi Bhatt Sharma

Romance

4.0  

vijay laxmi Bhatt Sharma

Romance

सुनहरे सपने

सुनहरे सपने

1 min
437


चंचल सपने करते भ्रमित

पलकों पर है पलते

पंख लगा इनको अब

नयनों तक है पहुँचाना


प्रेम से भरे प्याले हों ज्यूँ

स्नेह में ढले पुलकित करते

लेते चाँद से उसका उजाला 

इन्हें चाँदनी सा है महकाना


प्यार के बंधन से बंध 

निश्छल चंचल चपल ये

जुगनू बन जगमगाते यहाँ

इन्हें अमर है अब बनाना


पुलकित करते ये हर क्षण

निज जीवन को सहलाते हर पल

उज्ज्वल निर्मल इनका मन

चिर स्नेह इनमे है बसाना


मधु के दिन मधुर बहुत

स्वप्न बन महकते रोज यूँ

खुली आँखों का हो सच ज्यूँ

बंधी रहे जीवनभर प्रीत की डोर ये वर दे जाना।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance