STORYMIRROR

Writer Nishant

Tragedy Action

3  

Writer Nishant

Tragedy Action

शायद कुछ कहना चाहती थी

शायद कुछ कहना चाहती थी

1 min
119

ना तूने सोचा था ना मैंने 

क्या से क्या हो गया

बस्स देखते देखते


ना तूने कहा ना मैंने कहा 

दिल की बाते लब्जो में बंया हो सके   

पहले तू पहले तुम के चक्कर में 


भूली बिखरी यादे ,वो सौगाते 

तू तो चली गई यूँही 

शायद कुछ कहना चाहती थी


कह ना पाई या मैंने सुना नहीं 

अजबसी घुटन हैं अब तो 

कह सकते हैं ना सह सकते हैं 


यह कैसा प्यार तेरा ?

भूल न चाहे तुम्हे तो 

उतनी ही याद आये 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy