STORYMIRROR

मानसिंह मातासर

Tragedy

4  

मानसिंह मातासर

Tragedy

अजनबी

अजनबी

1 min
278

मिलने पर प्रणाम नहीं

और नहीं समाचार

वार त्यौहार जाते नहीं

नहीं भेंट उपहार


सुख दुःख दूर से

देखे नजर तरेर

प्रतिपल शक से चले

रहा नहीं विश्वास


ये शहर है साथियों

और शहर के लोग

जहाँ हैं सब अजनबी

एक दूसरे के लिए ।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy