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Yaswant Singh Bisht

Drama

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Yaswant Singh Bisht

Drama

क्या तुम्हें पढ़ना नहीं आता

क्या तुम्हें पढ़ना नहीं आता

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कुछ निशान बाकी हैं,

कागजों में,

कलम के,

अरे नहीं, स्याही के !


जो लिखे गए थे,

पढ़ने के लिए,

जानने के लिए,

समझने के लिए !


उन बातों को,

जो उन शब्दों में हैं,

शब्दों के बीच में हैं !


मगर क्यों, शब्द,

केवल अर्थ तक रह गए,

क्या तुम्हें पढ़ना नहीं आता !


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