क्या तुम्हें पढ़ना नहीं आता
क्या तुम्हें पढ़ना नहीं आता
कुछ निशान बाकी हैं,
कागजों में,
कलम के,
अरे नहीं, स्याही के !
जो लिखे गए थे,
पढ़ने के लिए,
जानने के लिए,
समझने के लिए !
उन बातों को,
जो उन शब्दों में हैं,
शब्दों के बीच में हैं !
मगर क्यों, शब्द,
केवल अर्थ तक रह गए,
क्या तुम्हें पढ़ना नहीं आता !
