Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!
Unlock solutions to your love life challenges, from choosing the right partner to navigating deception and loneliness, with the book "Lust Love & Liberation ". Click here to get your copy!

Anand Prakash Jain

Tragedy

4.5  

Anand Prakash Jain

Tragedy

कुदरत का इंतकाम

कुदरत का इंतकाम

1 min
332


मदमस्त होकर ताक़त में 

जो खेल तूने रचाया था,

युवा दरख़्तो का छेदन कर

घर जो अपना बड़ा बनाया था,


अब उसका भयंकर 

अंजाम भी देख,

कुदरत का भयावह 

इंतकाम भी देख।


ये जो हालत तेरे शहर की है 

उसका सेहरा निश्चय तेरे ही सर बंधेगा,

जो कत्लेआम तूने दरख़्तो का किया

उसका अंज़ाम अब पूरा शहर भुगतेगा।


हरे-भरे-आबाद कुदरत को

अपनी लालच से तूने ख़ूब छला है,

उजाड़ कर मुकों के हर्षित आलय

तू घृणित अमानवीय


चाले जो चला है,

अब उसका भयंकर 

अंजाम भी देख,

कुदरत का भयावह 

इंतकाम भी देख।


ये बाढ़, तूफ़ान, दुष्काल, भूस्खलन

सब तेरे ही कृत्यों कि प्रतिक्रिया है,

ख़ूब घात किए है इस धरती पर तूने

अब इसे भुगत 

ये उऋण होने की क्रिया है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy