सावन का उल्लास
सावन का उल्लास
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बांवरेे मन की भटकन,
जून की गर्मी की तपन,
वैश्विक महामारी की उथल पुथल,
विरह वेदना सहते प्रेमी युगल,
शुष्क अतृप्त खड़े वर्षाश्रीत कानन,
बेचैन कौलाहित मेघातुर उपवन,
शांत-वीरान-नीरव देवालय,
त्राहिमाम-मसरूफ़-कौलाहित रूग्णालय,
शनै-शनै ओझल होती आस,
और रूखे अधरों कि गहराती प्यास,
इस चित्र को मटियामेट करने
देखो फ़िर लौट आया है
सावन का उल्लास।
