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Anand Prakash Jain

Inspirational

4.5  

Anand Prakash Jain

Inspirational

शिक्षक

शिक्षक

1 min
462


मेरे जीवन में जो ये रंगत है

सद्गुणों की जो न्यूनाधिक जमघट है

उसका कारण शिक्षकों की संगत है

पग पग पर मुझको और संवारा

पग पग पर मुझको और निखारा ।


छुटपन से लेकर किशोर बनने तक,

किशोर से लेकर युवा होने तक,

हर किसी ने प्रतिदिन सिखाया है

अगुणित जन्मों तक उऋण ना हो सकूं

इतना खज़ाना लुटाया है ।


कभी अध्यापक के मानद रूप में

कभी मात पिता के प्रितिमय रूप में ।

कभी श्रीफल से कठोर बनकर

कभी मित्रो के मनोरम स्वरूप में

नित नए रूपों में ज्ञान अमिय बरसाया है

राष्ट्र को जग में गर्वित कर सकूं

इस काबिल मुझको बनाया है ।



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