STORYMIRROR

कुछ कहो

कुछ कहो

1 min
2.5K


कुछ कहो ना मेरा दिल बैचेन हो रहा है

साँसो मे रुकावट हो रही है


मेरे पैर कपकपा रहे हैं

मैं पसीने से नहा रहा हूँ


अंदर कुछ है जो ज़बां पर आ रहा है

आँखे खोलो ना कि मैं आया हूँ


कुछ तो बोलो ना कि इन्तजार खत्म हुआ है

मैं तेरे पास हूँ तू फिर क्यों जुदा जुदा है


कहो ना कुछ तो कहो ना

मेरी साँसो से रिश्ता टुट रहा है


कहो ना कुछ तो कहो ना


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Drama