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अमित प्रेमशंकर

Tragedy Inspirational Others

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अमित प्रेमशंकर

Tragedy Inspirational Others

कुछ भाई ऐसे होते हैं।

कुछ भाई ऐसे होते हैं।

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गोदी में रख कर सर उसका 

प्रभु श्री राम से रोते हैं 

इस घोर अंधेरी कलियुग में 

कुछ भाई ऐसे होते हैं।।


बनते लक्ष्मण भी शेषनाग 

धरती को सर धरने वाले 

राजभोग वैभव को छोड़ 

संग भाई के चलने वाले 

भाई के निश्छल प्रेम में डूब

कांटों में वन वन फिरते हैं 

इस घोर अंधेरी कलियुग में 

कुछ भाई ऐसे होते हैं।।


भाई का हक भाई का हो

कह भईया भरत जी रोते हैं

पादुका रख सिंहासन पर 

वह स्वयं धरा पर सोते हैं 

महाराज अवध का होकर भी 

संतों से दिन बिताते हैं 

इस घोर अंधेरी कलियुग में 

कुछ भाई ऐसे होते हैं।।


जन्मों तक साथ निभाने को 

कुछ कसमें ऐसी खा बैठे 

भाई की जान बचाने को 

अपनी भी जान गंवा बैठे 

उस दानव कुंभकर्ण के जैसे

ईश्वर से लड़ जाते हैं

इस घोर अंधेरी कलियुग में 

कुछ भाई ऐसे होते हैं।।



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