STORYMIRROR

fp _03🖤

Romance Tragedy

4  

fp _03🖤

Romance Tragedy

तड़प

तड़प

1 min
11

सजा ये ऐसी बढ़ रही 

उम्र मेरी ढल रही 

सुन तू भी सुन मेरी 

आज जो मैं कह रही।


रहूं उदास घड़ी घड़ी

बेजान सी मैं पड़ी पड़ी

देख तू भी देख सही

कैसे मैं हूं मर रही।।


फ़र्क तुझे न ज़रा सा भी

रूह मेरी तड़प रही

तूं क्या जाने पीड़ा मेरी

मेरे दिल की ना तुझपे पड़ी।


लिखूं मैं अब हर बार की

जीत की ना आस रही

ये मौत अब रजा मेरी

मैं तो बस अब थक गई।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance