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Kumar Kishan

Romance


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Kumar Kishan

Romance


मेरे अल्फाज

मेरे अल्फाज

1 min 397 1 min 397

खुद को मिटाकर उन्हें

मुक्कमल कर दिया हमने

फिर क्यों, उनकी निगाहों

में बेवफा बन गए हम


कभी-कभी पूछती है मेरी तन्हाई

मुझसे यह सवाल....

गर इश्क गुनाह है, तो

गुनाहगार क्यों बन गए हम


माना कि ऐ जिंदगी....

मेरे मुकद्दर में इश्क नहीं

जाकर कह दो उनसे

रुसवा होकर यह आशिक

दिल कहीं लगाता नहीं।

   


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