STORYMIRROR

Kumar Kishan

Abstract

4  

Kumar Kishan

Abstract

यादें

यादें

1 min
296


जब कभी तन्हाई में होता हूँ

दिल में वेदना सी उठती है

यादों का सागर....

मानो,अपनी आगोश में लेता है

तब,मुश्किल होता है

यादों से पीछे छुड़ाना

बड़ा कठिन होता है फिर,

मन को समझाना

यादों के बारें में क्या लिखूं

यादें तो नीम की तरह

कड़वी होती है तो

मिठाई की तरह मीठी होती है

जिंदगी में तो हम

बहुत कुछ खोते,पाते हैं

फिर भी,यादें तो बस

यादें बनकर रह जाती हैं!

 


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract