STORYMIRROR

Sonali ganguly

Romance

3  

Sonali ganguly

Romance

जब हम बिखरने लगे

जब हम बिखरने लगे

1 min
247

जब जब बिखरने लगे

उन लम्हों ने संभाल लिया

अँधेरा ज़िद पर अड़ा था

तो हमने यादों को ही जला दिया

फिर भी चुभती रही कांटों सी

हमने अपने सपनों की भी बलि दिया


जुड़े थे जो कभी कुछ उम्मीद के तार

रौशनी बन कर जिसने हमेशा साथ दिया

उन्हीं राहों पर उनसे भी तोड़ा नाता मैंने

और जख्मों को दिल में छुपा लिया

ख़ामोशी में खो गए एहसास मेरे

तब से आज तक हमने गम का ज़हर पीया


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance