STORYMIRROR

राही अंजाना

Drama

3  

राही अंजाना

Drama

कठपुतली

कठपुतली

1 min
380

दिल ने धड़कन की ही मान लो के अब सुनना छोड़ दी, 

स्त्री को नचाया जबसे इंसा ने कठपुतली बुनना छोड़ दी,


देखती ही रहीं आँखों की दोनों पुतलियाँ एक दूजे को,

उँगलियों के इशारों पर हाथों ने सुतली चुनना छोड़ दी।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama