manisha suman
Classics
कठपुतली
एक डोर से बँधी
जीवन खेल।
खीचें डोर को
चलती इशारों पे
हाथ किसी के।
रचता खेल
बना कठपुतली
रंगमंच पे।
उठा पर्दा को
सुख दुख रंग को
नित दर्शाया।
मुक्तक....प्र...
भीड़
संकल्प
प्रेम
मेरा घर
भय /डर
स्वाभिमान माँ...
ईर्ष्या
माँ (मुक्तक)
वसुधैव कुटुम्...
उसी पे बार-बार बहकर वह देखती मुझे बच -बचकर वह मुस्कुराती- उसी पे बार-बार बहकर वह देखती मुझे बच -बचकर वह ...
जानते तो थे उसे, कई ज़माने से। बन के रह गये वो अब फ़साने से॥ जानते तो थे उसे, कई ज़माने से। बन के रह गये वो अब फ़साने से॥
कुछ खोने से दर्द तो होता है, कुछ नेहीँ पाने से भी होता है। कुछ खोने से दर्द तो होता है, कुछ नेहीँ पाने से भी होता है।
मदद को कब आओगे बतलाओ तुम माखनचोर ? मदद को कब आओगे बतलाओ तुम माखनचोर ?
हर्फ़-दर-हर्फ़ है लहू दिल का ख़त जला ही सही मिरा दे दे। हर्फ़-दर-हर्फ़ है लहू दिल का ख़त जला ही सही मिरा दे दे।
जीता है वही जो जमीं से जुड़ा हो ज्ञानी लोगों का है बस यह कहना। जीता है वही जो जमीं से जुड़ा हो ज्ञानी लोगों का है बस यह कहना।
काश ना होते हम और तुम आप होते सिर्फ आप और मैं होता सिर्फ मैं। काश ना होते हम और तुम आप होते सिर्फ आप और मैं होता सिर्फ मैं।
चलो जब वक़्त के जानिब तो रक्खो साफ़ दामन को कहीं ऐसा न हो 'अस्मित' तू माजी से ही डर जाए। चलो जब वक़्त के जानिब तो रक्खो साफ़ दामन को कहीं ऐसा न हो 'अस्मित' तू माजी से ह...
मंगल मूर्ति मोरया आस्था का दीपक विश्वास की बाती इन्हीं से करूं मैं बप्पा की आरती। मंगल मूर्ति मोरया आस्था का दीपक विश्वास की बाती इन्हीं से करूं मैं बप्पा ...
अपने काम में मस्त रहो सदा कर्म से बडी़ न पूजा यार।। अपने काम में मस्त रहो सदा कर्म से बडी़ न पूजा यार।।
ये जिंदगी तेरी है तो फिर क्यों न एक बार खुद पर यकीन तो कर। ये जिंदगी तेरी है तो फिर क्यों न एक बार खुद पर यकीन तो कर।
सादा सच्चा ईमान रहे जज्बातों की ना हो चोरी। सादा सच्चा ईमान रहे जज्बातों की ना हो चोरी।
खबर मिली है फलक से तारे जमीं पे आकर जमे हुए हैं। खबर मिली है फलक से तारे जमीं पे आकर जमे हुए हैं।
हर वर्ष पधारो आंगन मेरे, हर लो मेरे सब दुख अज्ञान। हर वर्ष पधारो आंगन मेरे, हर लो मेरे सब दुख अज्ञान।
कल खत्म हो गई थी मुझसे पर आज उस भूली हुई डगर पर जाऊं भी तो कैसे ? कल खत्म हो गई थी मुझसे पर आज उस भूली हुई डगर पर जाऊं भी तो क...
निहायत बेढंगा जीवन था ये मेरा इस बदले हुए नये ढंग में तुम हो। निहायत बेढंगा जीवन था ये मेरा इस बदले हुए नये ढंग में तुम हो।
सत्य सहमी दृष्टि बस गाड़े रहा बाजार पर। सत्य सहमी दृष्टि बस गाड़े रहा बाजार पर।
ये तो नहीं उचित है, रस्ते से लौट आना । आसान भी नही है, जीवन के पार जाना ।। ये तो नहीं उचित है, रस्ते से लौट आना । आसान भी नही है, जीवन के पार जाना ।।
"ख्यालों" को मेरे मंजिल मिल जाए बस तू आकर मेरे रूह में समा जाए ! "ख्यालों" को मेरे मंजिल मिल जाए बस तू आकर मेरे रूह में समा जाए !
जिन्दगी सम्बन्ध तुमसे आज तोड़े जा रहा हूँ। जिन्दगी सम्बन्ध तुमसे आज तोड़े जा रहा हूँ।