STORYMIRROR

chandraprabha kumar

Fantasy

3  

chandraprabha kumar

Fantasy

क्षणिकाएँ

क्षणिकाएँ

1 min
144

चिड़ियॉं चहकीं

सूरज निकला

हवा बही

घास गीली

नन्हींपत्ती

ओस से भीगी। 

   

डाल लगा

लाल कनेर,

फूल झरे

पेड़ तले,

 गेंदा पीला

जीनिया खिला। 

 

उनींदा स्वप्न जाग गया,

अधजगी शबनम मुस्करा दी।

लबों पे अब,

मुस्कराहट आने लगी।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Fantasy