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chandraprabha kumar

Fantasy

3  

chandraprabha kumar

Fantasy

क्षणिकाएँ

क्षणिकाएँ

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चिड़ियॉं चहकीं

सूरज निकला

हवा बही

घास गीली

नन्हींपत्ती

ओस से भीगी। 

   

डाल लगा

लाल कनेर,

फूल झरे

पेड़ तले,

 गेंदा पीला

जीनिया खिला। 

 

उनींदा स्वप्न जाग गया,

अधजगी शबनम मुस्करा दी।

लबों पे अब,

मुस्कराहट आने लगी।


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