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Shravani Balasaheb Sul

Romance Tragedy Others

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Shravani Balasaheb Sul

Romance Tragedy Others

कशमकश

कशमकश

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न जाने कितनी हसरतों से हारकर

तुमसे मुलाकात की ख्वाहिश तोड़ दी 

फिर जब अचानक रूबरू हुए तुम

दिल से धड़कने की उम्मीद छोड़ दी 

थमी सांसों का बोझ सीने पर और

बरसती नजरों का सैलाब नैनों में

तू फिर से वही ले गया मुझे 

बिछड़े भूले से सावन के महीनों में

फिर वही तू.. फिर वही मैं

मगर मीलों आगे निकल चूका वक्त

तेरे मेरे हिस्से की कहानी

अब सालों बाद निगल चूका वक्त

कुछ तो तेरी आंखों का कहना था

जब देख के अनदेखा किया तूने

या बस मेरी नज़र का वहम

कि वही पुराना लम्हा फिर जिया तूने

मगर जब हिचक से हँस दिए तुम

तो लगा कि पुरानी पहचान बाकी हैं

और बेहाल देख तुझको इस कदर

यकीन हुआ.. कि कुछ निशान बाकी हैं

मुझसे मेरा हाल पूछ के तूने

पता हैं...बस अदब निभाया

पर क्यूं तेरे एक सवाल से

मन अश्कों से भर आया

लगा कि तुझसे सब कह दूँ

दिल का भंवर खाली कर दूँ

तुम तब भी पराए आज भी बेगाने

फिर भी लगा कि .. हाँ सब कह दूँ

मगर यह बस खयालों की बातें

न मैंने कहनी थी न तूने सुननी थी

बस तेरे सवाल पे डगमगाकर

बिन सोचे ही मैंने हामी भर देनी थी

तेरा फिर चले जाना और

दूर तक मेरा तुझे तकते रहना

फिर एक दफा दोहरा गई बात

तेरा किनारा पाना और मेरा बह जाना

हाँ मगर बहक जाना सही नहीं

माना अतीत से दोस्ताना सही नहीं

तो फेर ली नजरें भारी पलकों के साथ

जला दे तो आग से लिपट जाना सही नहीं



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