STORYMIRROR

JAI GARG

Romance

3  

JAI GARG

Romance

कोन थी वो?

कोन थी वो?

1 min
308


दिल चैन सब छीन गया 

अब तो नैयना मिलाकर

पाँव ज़मीन पर न रूकें

तुमसे दिलको लगाकर.


दीन ईमान का क्या सौदा किया

छोड़ दिया हमने तेरे संसार को

ख़फ़ा क्यो हो, सोचो तो ज़रा

क्या जीकर करें, लुटे तेरे प्यार मे.


ना दिल का हे चैन क्यो रूसवा हुए?

जब से देखा उन्हें नैयन मिलाकर;

होली मे थी कोन वो रंगो मे घिरी

छाई रही यों मन मे वो नजंरें चुराती


कुछ बहका अनदाज, मुस्कुराते होट

चंचल सी बलखाती अदाए उसकी

बहकती अंदाओ से हमे देखती रही, वो

नशा भंग कर गई, होली की ख़ुमारी मे।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance