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Sachhidanand Maurya

Abstract

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Sachhidanand Maurya

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कोई तो है सुपर पावर

कोई तो है सुपर पावर

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अपने जालों में सबको उलझा रहा है,

वही हंसा रहा है वही रूला रहा है,

जब तुम याद नहीं करते उसको तब,

पूछता है मनुज तू मुझे क्यों भुला रहा है।


उसका ही चारों ओर चलता हुकूमत,

उसके ही बनाए नफ़रत, और मोहब्बत,

सारा प्रपंच झूठा है उसका फंसाने के लिए,

केवल और केवल उसका वजूद हकीकत।


कभी वक्त निकाल सर सजदे में झुका ले,

फिर मांग उससे और उससे पा ले,

वो दाता विधाता, मौला, खुदा, वही ईस है,

लगा ध्यान और चक्षु से पर्दा हटा ले।



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