STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Abstract

4  

Surendra kumar singh

Abstract

टूटे हुये सपने

टूटे हुये सपने

1 min
395

टूटे हुये सपनों‌ के बियाबान में

सपनों का अनवरत आते रहना,

जीवन की जीवन्तता है

और टूटे हुये सपनों के कैनवास पर

ऐसा कोइ चित्र बनाना

जिसमें टूटन की झलक न‌ दिखे

कलाकार‌ की अदभुत कृति है,

और शब्दों का ऐसा कोइ झुंड

जो जीवन को‌ उमंग से भर दे

अतीत और भविष्य को

अपने अन्दर समाविष्ट कर‌ ले

साहित्यकार का नवगीत है।

नये प्रेम का दौर है

और सब संवर रहे है

परमात्मा भी संवरने के मोह से

कहाँ अलग हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract