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Dr. Poonam Gujrani

Classics


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Dr. Poonam Gujrani

Classics


ख्वाबों की पतंग

ख्वाबों की पतंग

1 min 192 1 min 192

ख्वाबों की

रंगीन पतंगें

उड़ती रही 

जीवन‌ के आसमान में

इठलाती, बलखाती

धागे से अपना

रिश्ता निभाती....।


लेकिन जब 

किसी दूसरे धागे ने 

पहले को काटा

पतंग और धागे बांटा

पतंग ने

नहीं की 

एक क्षण की देर

समेटकर अपनी समस्त हसरतें

समा गई 


मां धरती के आगोश में 

बिना किसी शिकायत के

क्यों कि वो जानती है

अनंत है आकाश

अनंत है ख्वाहिशें

पर

जीवन है

क्षणभंगुर, छोटा सा।


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