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Dr. Poonam Gujrani

Classics

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Dr. Poonam Gujrani

Classics

ख्वाबों की पतंग

ख्वाबों की पतंग

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ख्वाबों की

रंगीन पतंगें

उड़ती रही 

जीवन‌ के आसमान में

इठलाती, बलखाती

धागे से अपना

रिश्ता निभाती....।


लेकिन जब 

किसी दूसरे धागे ने 

पहले को काटा

पतंग और धागे बांटा

पतंग ने

नहीं की 

एक क्षण की देर

समेटकर अपनी समस्त हसरतें

समा गई 


मां धरती के आगोश में 

बिना किसी शिकायत के

क्यों कि वो जानती है

अनंत है आकाश

अनंत है ख्वाहिशें

पर

जीवन है

क्षणभंगुर, छोटा सा।


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