खुशी बड़ी अनमोल रे
खुशी बड़ी अनमोल रे
खुशी बड़ी अनमोल रे पैसों में मत तोल रे
अशक्त को दे सहारा, मिश्री मन घोल रे ।
बच्चों संग हो बच्चा कागज कश्ती ठेल।
मेघों से क्या डरना, बूंद फुहारों संग खेल ।
मोती सी ओस बूंदें नजरों को है हर्षातीं ।
यही जीवन की सच्ची खुशियां सरसरातीं ।
रेड सिग्नल देख, होता है तू क्यों परेशान
चलो सुन गायन ओठों में लायें मुस्कान ।
रूठो को मना लगा गले ये एक कला है
ये सुकून खुशी से कम भला कैसा गिला ।
ईश्वर प्रकृति की अद्भुत कारीगरी झांकें
भौतिक चमक के पीछे हम क्यों भागें।
जीवंतता से महत्व पर रखें पहरेदारी
कुछ समय गुजारें अपनों संग सुखकारी।
हम जैसे हैं वैसे रहें तुलना करना छोड़े
अपनी राह परमात्मा ध्यान की ओर जोड़े।
