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मिली साहा

Tragedy

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मिली साहा

Tragedy

ख़ुशामदी टट्टू होना

ख़ुशामदी टट्टू होना

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ख़ुशामदी टट्टुओं का ही तो अब चलता है सिक्का इस दुनिया में,

दिन-रात शराफत से काम करने वालों की कीमत नहीं इस जहांँ में,


हुनर के बल पर कोई आगे बढ़ना चाहे तो उसे गिराने वाले बहुत हैं,

खुशामदी टट्टूओं की गद्दारी को अमृत समझ कर पीने वाले बहुत हैं,


स्कूल, कॉलेज, दफ्तर, हॉस्पिटल चाहे हो वो राजनीति का अखाड़ा,

झूठे दिखावे की चासनी घोलने वालों का ही तो हर तरफ़ बोलबाला,


ऐसे लोग तो काम निकल जाने पर लात मारने से भी नहीं कतराते हैं,

स्वाभिमान तो इनमें होता ही नहीं ये तो बस अपना ही लाभ देखते हैं,


ऐसे लोगों से तो दुश्मन भले हैं जो कम से कम सामने से वार करते हैं,

इन लोगों की योजना भी भाप नहीं सकते ऐसी मीठी छुरी चलाते हैं।



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