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ayush jain

Romance Others

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ayush jain

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"कभी कभी यूंही"

"कभी कभी यूंही"

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इस बेरंग जिंदगी में बहुत से रंग बन के छा जाती हो,

तुम "कभी कभी यूं ही" याद आ जाती हो..


जब छोड़ ही दिया है मुझे तो एक बात बताओगी क्या,

तुम सच में मुझे भूल पाओगी क्या,

पूछता हूँ आज बहुत से सवाल, एक का भी जवाब दे  पाओगी क्या,

क्यूं बिना बुलाए रोज़ मेरे ख्वाबों में आ जाती हो,

तुम "कभी कभी यूं ही" याद आ जाती हो..


खाई थी कसमें तुमने इन चांद सितारों को देख कर,

इनसे दोबारा नजरें मिला पाओगी क्या,

बहुत शौक से आती थी ना मेरी बांहों में तुम,  

किसी गैर कि बांहों में उसी तरह सिमट पाओगी क्या,

बन के आंसू इन आँखों में तुम अक्सर चली आती हो, 

तुम " कभी कभी यूं ही" याद आ जाती हो..


बहुत सी किश्तों में टूटा हूँ मैं, मुझे फिर से जोड़ पाओगी क्या,

पता हो अगर इस दर्द कि दवा तो मुझे

उस दवाखाने तक छोड़ आओगी क्या,

मुझ सा कोई नहीं मिलेगा दोबारा तुम्हें ये बात कैसे भूल जाती हो,

 तुम "कभी कभी यूं ही" याद आ जाती हो..


देख ये दुनिया वाले बहुत सवाल करते हैं, 

तेरे जाने के बाद मेरा जीना बेहाल करते है,

जिन हाथों पर मेहंदी से लिखा था मेरा नाम

कभी वो नाम इन्हें दिखा पाओगी क्या,

क्या वजह थी तुम्हारे जाने कि इन्हें समझा पाओगी क्या,

मेरी तो सुबह हो  जाती है तुम्हें याद करते करते,

क्या तुम अब भी जल्दी सो जाती हो,

तुम " कभी कभी यूं ही" याद आ जाती हो..


देखो याद करता है दिल तुम्हें अब भी कभी-कभी, 

इसे भूल जाने का हुनर सिखा पाओगी क्या,

भटक रहा हूं तेरे शहर तेरी गलियों में मैं, 

इस  पागल को अपने घर का पता बताओगी क्या, 

मैं देख कर तुम्हें दूर से ही लौट जाऊँगा,

तुम इतना क्यों घबराती हो, तुम "कभी कभी यूं ही" याद आ जाती हो..


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