STORYMIRROR

Indraj Aamath

Classics Inspirational

4  

Indraj Aamath

Classics Inspirational

कभी देखा है उन बादलों को

कभी देखा है उन बादलों को

1 min
425

कभी देखा है 

उन बादलों को

जो घने है काले है

डरावने है फिर भी

सुहावने लगते हैं


कभी बरसे हैं

जीवन दाता बनके

तो कभी बरसे

एक कहर बनके


कभी देखा है

उन बादलों को

झर झर मधुर मधुर

 संगीत सुनाते हैं


बिजली गरजी तो 

रुह भी कंपाते है

बादल जो बरसे वो 

झूम झूम के ये

सब को नचाते है


कभी देखा है

उन बादलों को

जो शोर करते है

घनघोर बरसते है

कही ये रात सुहानी

तो कही आंखों में

विरानी जगाते है


जो शरणों में भी

काल बन जाते है

सागर किनारे अक्सर

बस्तियां उजड़ाते हैं

कहीं राह मिटाते हैं

कहीं राह बनाते हैं

कभी देखा है 

उन बादलों को

जो प्यार जगाते हैं।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Classics