कैसी दुनिया
कैसी दुनिया
कैसी दुनिया हो चुकी है यार,
लोगों का attitude ही हो गया आ बैल मुझे मार।
वाक़ई दुनिया बदल तो रही है क्योंकि
हर कोई होने लगा है इससे दो चार।
कैसी दुनिया...
भंवर में ख़ुद को ख़ुद ही फंसा लेते है बार-बार,
तभी तो चुभते हैं नुकीले ख़ार।
वाक़ई दुनिया जीना तो सीख रही है क्योंकि
हर कोई होने लगा है इससे बेज़ार।।
कैसी दुनिया...
