नारी
नारी
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जो SHE में HE छुपा के रखती है,
जो WOMAN में MAN सजा के रखती है।
फिर कैसे वो दुनिया भर में सिसकती है?
जो नारी में नर धारण करके रखती है।।
जो हर दुःख अंजुमन में दबाके रखती है,
जो हर ख़्वाहिश दिल में छुपा के मुस्कुराती है।
फिर कैसे दुनिया भर में तड़पती है?
जो हर दर्द सीने से लगाके हँसती है।।
