Akanksha Gupta (Vedantika)
Classics Inspirational
जीवन पथ के मार्ग पर
तुमने चलना सिखाया
एक अबोध बालक को
एक जिम्मेदार नागरिक बनाया
एक किरण प्रकाश की तुम
मेरे जीवन में अंधकार
कैसे व्यक्त करूँ आभार।
मिलन का रंग
मोहब्बत का दा...
ज़िंदगी
ज़िम्मेदारियों...
सौगात
बाकी है
अधूरी रह गई
नसीब में नहीं...
दिल की नज़र से
वीरानियाँ
रास लीला की कथा को, मैं सुनाता आज। ध्यान से सुन लो मनोहर, गूढ़ है ये राज॥ रास लीला की कथा को, मैं सुनाता आज। ध्यान से सुन लो मनोहर, गूढ़ है ये राज॥
शीश झुकाऊँ गुरु चरण में, आज यहाँ गुरु की महिमा कहता हूँ। शीश झुकाऊँ गुरु चरण में, आज यहाँ गुरु की महिमा कहता हूँ।
अक्रूर जी कहें कि आप कारण हैं प्रकृति आदि समस्त कारणों के । अक्रूर जी कहें कि आप कारण हैं प्रकृति आदि समस्त कारणों के ।
ये कहानी है क्रोध और अहंकार में चूर लंकापति रावण की। ये कहानी है क्रोध और अहंकार में चूर लंकापति रावण की।
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान ने तब संकल्प कर लिया। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित भगवान ने तब संकल्प कर लिया।
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित सुनकर जरासंध के वध को। श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित सुनकर जरासंध के वध को।
काँप रही थी पृथ्वी, स्वर्ग भी था भयभीत। महिषासुर ने लिया, तीनों लोकों को जीत। काँप रही थी पृथ्वी, स्वर्ग भी था भयभीत। महिषासुर ने लिया, तीनों लोकों को जीत।
कैसे एक साधारण इंसान देवता समान ही श्रेष्ठ हो सकता है। कैसे एक साधारण इंसान देवता समान ही श्रेष्ठ हो सकता है।
लोकमर्यादा की रक्षा के लिए वहीं पर यज्ञ किया था उन्होंने। लोकमर्यादा की रक्षा के लिए वहीं पर यज्ञ किया था उन्होंने।
कृष्ण बने वो हर युग के, सच्चे दोस्तों का मिला दोस्ताना। कृष्ण बने वो हर युग के, सच्चे दोस्तों का मिला दोस्ताना।
कृष्ण पत्नियाँ उनके बिछोह की आशंका में व्याकुल हो जातीं सब । कृष्ण पत्नियाँ उनके बिछोह की आशंका में व्याकुल हो जातीं सब ।
परीक्षित, भगवान की आज्ञा मानकर अक्रूर हस्तिनापुर चले गए। परीक्षित, भगवान की आज्ञा मानकर अक्रूर हस्तिनापुर चले गए।
जरासन्ध की सेना ने वहाँ वाणों की वर्षा कर दी थी. जरासन्ध की सेना ने वहाँ वाणों की वर्षा कर दी थी.
श्रीकृष्ण की सुन लो कथा तुम, आज पूरे ध्यान से। भवसागरों से मुक्ति देती, यह कथा सम्मान । श्रीकृष्ण की सुन लो कथा तुम, आज पूरे ध्यान से। भवसागरों से मुक्ति देती, यह कथ...
पाँच भूतों से विराट शरीर, ब्रह्माण्ड का निर्माण करते वे. पाँच भूतों से विराट शरीर, ब्रह्माण्ड का निर्माण करते वे.
हाथ बढ़े तो देश की खातिर कंठ से हो बस जय जयकार हाथ बढ़े तो देश की खातिर कंठ से हो बस जय जयकार
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित कृष्ण बलराम एक दिन गए थे प्रातक़ालीन प्रणाम करने के श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित कृष्ण बलराम एक दिन गए थे प्रातक़ालीन प्रण...
आज युद्ध की आहूती में बारी मेघनाद की आई थी मारूँगा या मर जाऊँगा सौगंध पिता की खाई थी आज युद्ध की आहूती में बारी मेघनाद की आई थी मारूँगा या मर जाऊँगा सौगंध पिता क...
भगवान शिव का विवाह था बड़ा अद्भुत और अनोखा। भगवान शिव का विवाह था बड़ा अद्भुत और अनोखा।
श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित श्री कृष्ण की प्रत्येक पत्नी से. श्री शुकदेव जी कहते हैं परीक्षित श्री कृष्ण की प्रत्येक पत्नी से.