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Kanchan Prabha

Abstract Romance Fantasy

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Kanchan Prabha

Abstract Romance Fantasy

काली घटा और इन्तजार

काली घटा और इन्तजार

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काली घटा घनघोर रे साथी

अब तो वापस आजा

बुझती जाये सब्र की बाती

अब तो वापस आजा।

तेरे बिना मेरी दुनिया उदास रे

तुझसे मिलन की मुझको है प्यास रे

विरह के गीत मेरी होठों पे आती

काली घटा घनघोर रे साथी।


तेरे इश्क का ऐसा मुझे बुखार चढ़ा रे

क्या तुने आज का अखबार पढ़ा रे

मेरे मौत की खबर जिसमें समाती 

काली घटा घनघोर रे साथी।


धड़कनों को धड़कन का इन्तजार है

तू न जाने तुझसे कितना मुझको प्यार है 

तुझे याद करते हुये मैं प्रेम के गीत गाती 

काली घटा घनघोर रे साथी।


 अब तो वापस आजा 

बुझती जाये सब्र की बाती।


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