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Dinesh paliwal

Action Inspirational

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Dinesh paliwal

Action Inspirational

जो बीत गयी सो बात गयी

जो बीत गयी सो बात गयी

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जीत हार कुछ और नहीं,

एक सिक्के के पहलू बस दो,

है हार तभी जब मन हारे,

सीख से तुम ये जीवन भर दो,

जीत का स्वाद लगे फीका,

जब कुंठा खा जाती सोच नयी,

तो मंत्र रखो इस जीवन में,

जो बीत गयी सो बात गयी ।।


मन का चाहा जो मिल जाता,

तो उस से अच्छा क्या होता,

जो आज मिला ना मनमाफिक,

तो होकर निराश क्यों कर रोता,

इसे मान नियति श्रम और बढ़ा,

रच रहे विधाता कोई नीति नयी,

अब छोड़ विफलता की यादें सब,

जो बीत गयी सो बात गयी ।।


अनुभवों की है टोकरी ये जीवन,

खट्टे, मीठे और कुछ कसैले भी,

लक्ष्य प्राप्ति को किये कर्म सब,

कुछ उजले भी तो कुछ मैले भी,

एक लंबी सी छलांग लगाने को,

दो पग पीछे लेना रणनीति नयी,

कर निश्चय भ्रम तोड़ दे सब अब,

जो बीत गयी सो बात गयी ।।


गुज़री बातों को यूँ बिसराना ,

इतना भी आसान नहीं होता,

ये नहीं रेत पर उकरी पंक्ति,

जो जल निर्मल पल पल धोता,

कितने ही ऐसे जख्म मिले हैं,

जो रह रह कर बस रिसते हैं,

रस्सी ज्यों घिसती है सिल पर,

सदियों तक निशां वो दिखते हैं,

चोट मिली जो गए वक़्त से,

उनकी अबतक न टीस गयी,

अब तुम ही कहो कैसे कह दें,

जो बीत गयी सो बात गयी।।


फिर क्या उन घावों कि याद से,

आगे का पथ चलना छोड़ें,

या फिर कर कलुषित इस मन को,

हर आशा हर एक रिश्ता तोड़ें,

भूत हमें बस अनुभव दे जाता,

वो बनता भविष्य का आधार नहीं,

इतिहास सिखाता है हमको बस,

सीखो और पकड़ो एक राह नई,

जो बीत गयी सो बात गयी ।।

जो बीत गयी सो बात गयी ।।



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