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Hemant Kumar Saxena

Abstract Action

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Hemant Kumar Saxena

Abstract Action

जल के वचन

जल के वचन

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कद्र करो मेरी मैं कण्ठ को त्रासित करता हूं,

तुम्हारा हक है मुझ पे आश्वासित करता हूं,


आज हूं कब्जे में तेरे तू चाहे जैसे बहाता है,

मुझ बिन जीवन अधूरा तुझे नहीं सुहाता है,


फ्री में मिल रहा था तब तुझे कद्र ना थी मेरी,

अरे ओ नादान इंसान मुझे खरीद के लाता है,


जरा तू सोच ऐ नादान तू मुझे बचा लेता,

बोतल में पानी के बदले दरिया से नहा लेता,


न्यूज़ छापने से भला कुछ करके भी दिखा,

मुझे बचाने के तरीके दुनिया को तू सिखा,


अब भी बचा लो मुझे तुम्हारे काम आता हूं,

ज्यादा भर जाऊं बर्तन में फ़ैला दिया जाता हूं,


सोचूं बूंद बूंद इकट्ठा हो कहीं तालाब बन जाता,

आज मुसीबत की घड़ी में तुम्हारे काम मैं आता,



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