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कवि धरम सिंह मालवीय

Drama

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कवि धरम सिंह मालवीय

Drama

जिंदगी  को  सज़ा  नहीं करना

जिंदगी  को  सज़ा  नहीं करना

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जिंदगी को सज़ा नहीं करना 

अब किसी से वफ़ा नहीं करना 


दिल  लगाया  खफ़ा जमाना हैं

अब किसी को खफ़ा नहीं करना


प्यार करके किसी हसीना से

चैन दिल से जुदा नहीं करना


प्यार में कर गए यहाँ पहले

चूक अब इस दफ़ा नहीं करना


देखकर मुफलिसी गरीबों की

तू कभी भी हँसा नहीं करना 


प्यार करके मुझे लगा अब तो

प्यार हो अब खुदा नहीं करना


कर भला लोग तो बुरा बोलें

अब किसी का भला नहीं करना


 देखकर के कभी तरक्की को

तू कभी भी जला नहीं करना 


जानते सब यहाँ मगर करते 

क्या करें और क्या नहीं करना 


सब पता है धरम यहाँ सब का 

अब किसी का पता नहीं करना 



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